अविद्यास्मिताराग्द्वेश्भिनिवेश


अविद्यास्मिताराग्द्वेश्भिनिवेश आज के समय में भी हम महर्षि पतंजलि के इस योगसूत्र को अपने समाज में फलित होते देख सकते हैं. पञ्च क्लेशों के चक्कर में जो आ जाता है वह चाहे जितना भी प्रयास करे दुर्गति की ओर ही जाता है. अविद्या तो सभी जानते हैं. अस्मिता यानि 'मै- पना' यानि मैं ही सबकुछ हूँ राग यानि अत्यधिक लगाव. द्वेष यानि जलन अभिनिवेश यानि मृत्यु का डर आज के सामाजिक परिपेक्ष में हम देखें तो पाएंगे की जिन नेताओं में ये पञ्च क्लेश पाये जा रहें हैं वे हो सकता हो अभ कुछ समय तक सफल दिखेंगे लेकिन आगे चल कर उन का पतन निश्चित है. समाज को सचेत हो कर ऐसे लोगो को पहचानना चाहिए.

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