कौन खुद सक्षम है जो तुझ को दिशा दे पायेगा?


किसी का साथ,
किसी का हाथ
नहीं चाहिए रे मन
चल, हो अपनी धुन पर सवार
जग में निकल ,
ले कूंची हाथ में
और मन में अगन

कौन खुद सक्षम है
जो तुझ को दिशा दे पायेगा?
कौन शिव है यहाँ
जो प्रकृति को जीत पायेगा?

सदियों से तुझे आस थी
क्या मिला
बस उपहास ही!

माँ है तू , तू सृष्टि है
तू स्वयं नव निर्माण कर

चल, हो अपनी धुन पर सवार
जग में निकल ,
ले कूंची हाथ में
और मन में अगन

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