लिंग भेद, जाति भेद - जिम्मेदार कौन
हाल ही में माननीय मेनका गांधी जी के भाषण ने लिंग परिक्षण को अनिवार्य करने को ले कर समाज में फिर उसी बहस को शुरू कर दिया कि लिंग भेद आखिर क्यों? आज के जनसत्ता अखबार में सांसद श्री उदित राज जी ने भी लिंग एवं दलित भेद भाव को लेकर कुछ प्रश्नो को उठाया I रोहित वेमुला जैसी घटना हो या निर्भया कांड हो, क्यों कुछ समय के बाद ये खबरें केवल सालाना श्रद्धांजलि दिवस के रूप में ही बन कर जातीं हैं? आज के अखबारों में एक मूक एवं बधिर लड़की के साथ दुष्कर्म की खबर आई है और शायद ट्विटर पर कुछ लोग रोष भी प्रकट करेंI परन्तु हम अपने अतीत से कुछ नहीं सीखतेI मैंने कहीं पढ़ा था कि अंबेडकर इस बात के खिलाफ थे की गांधी दलितों के उत्थान की बात करें I जिसने कभी वो अपमान सहा ही नहीं वो उस के बारे में कैसे महसूस कर सकता है ? हाल ही में महिलाओं को मंदिरों में जाने की अनुमति न होने पर कुछ में एक खबर बनी जिसका दोहन मिडिया ने हमेशा की तरह बखूबी किया I उनका काम है तत्थ्यों पर खबर बनाना और उसे जनता तक पहुँचाना , वे ये काम बखूबी करते हैं I ये खबरें आम जनता की सुबह की चाय , मेट्रो के सफर, शाम की सैर और रात का खाने म...